ऋग्वैदिक काल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. कूपों से की जाने वाली सिंचाई ने कृषि को प्लावनीय मैदानों और नदी किनारों की पट्टियों से दूर वर्तमान पंजाब और हरियाणा के मैदानों में विस्तृत होने का अवसर दिया जहाँ भूमिगत जल स्तर सतह के पर्याप्त समीप था।
II. कूपों से पानी निकालने के लिए भारवाही-पशु शक्ति का प्रयोग किया गया।
निम्नलिखित में से कौन-सी सूचना, उपर्युक्त कथनों का समर्थन करती है/हैं ?
- ऋग्वेद में, पानी निकालने के लिए अश्म चक्र (पत्थर की घिरनी) और आहाव (पट्टी से कसा हुआ लकड़ी का डोल) के उपयोग के साक्ष्य हैं।
- ऋग्वेद में पर्शु/कुलीश (कुल्हाड़ी) और दात्र/सृणी (हँसिया) जैसे उपकरणों के उपयोग का उल्लेख मिलता है।
- ऋग्वेद से पहले भी, भूमि को जोतने और गाड़ियों को खींचने के लिए बैल के उपयोग का इतिहास मिलता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
केवल 1 और 2
1, 2 और 3
केवल 1 और 3
केवल 3
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Correct Answer: B — 1, 2 और 3
Explanation:
तीनों सहायक बिंदु गंगा मैदान में कृषि-विस्तार के साथ मेल खाते हैं। डोल और चरखी जैसी कुएँ से पानी निकालने की पद्धति का साक्ष्य बाढ़-मैदानों से बाहर सिंचाई का समर्थन करता है। कुल्हाड़ी और हंसिया जैसे कृषि उपकरण कृषि-विस्तार का संकेत देते हैं। बैलों की प्रारम्भिक उपयोगिता इस दावे का समर्थन करती है कि पशु कुओं से पानी खींच सकते थे।
