निम्नलिखित में से किस प्रमुख मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 3 या धारा 4 का लाभ इन प्रावधानों में निर्धारित सीमाओं के अधीन है और धारा 4 में 'निर्देश दे सकता है' शब्दों का अर्थ 'निर्देश देना चाहिए' नहीं है?
गुजरात राज्य बनाम वी.ए. चौहान (एआईआर 1983 एससी 359)
फूल सिंह बनाम हरियाणा राज्य (एआईआर 1980 एससी 249)
राम प्रकाश बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य (एआईआर 1973 एससी 780)
श्रीमती देवकी बनाम हरियाणा राज्य (एआईआर 1979 एससी 1948)
Answer and explanation
राम प्रकाश बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य (एआईआर 1973 एससी 780) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 3 और 4 अनिवार्य नहीं हैं, क्योंकि इनमें 'अवश्य' के स्थान पर 'हो सकता है' शब्द का प्रयोग हुआ है — अर्थात न्यायालय को परिवीक्षा देने में विवेकाधिकार प्राप्त है। फूल सिंह बनाम हरियाणा राज्य (एआईआर 1980 एससी 249) में न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 4 को न तो अनुचित उदारता के रूप में देखा जाना चाहिए और न ही अयोग्य मामलों में लागू किया जाना चाहिए।
