'Mens rea has no place while determining penal liability under Section 138 of the Negotiable Instruments Act, 1881'. This statement is:
Correct
Wrong
Partly correct
Depends upon facts of the case.
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'Mens rea has no place while determining penal liability under Section 138 of the Negotiable Instruments Act, 1881'. This statement is:
Correct
Wrong
Partly correct
Depends upon facts of the case.
As per Section 147 of the Negotiable Instruments Act, 1881, every offence punishable under the Act is:
Compoundable
Non-compoundable
Cognizable
Both (2) and (3) above.
निम्न में से कौनसे मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा परक्राम्य लिखत अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय के परिवाद ग्रहण करने के स्थानीय क्षेत्राधिकार के बिन्दु को संशोधन अध्यादेश, 2015 के परिप्रेक्ष्य में निर्णित किया?
(2016) 2 SCC 75, ब्रिजस्टोन इण्डिया प्रा. लि. बनाम् इन्दरपाल सिंह।
(2016) 11 SCC 105, के. एस. जोसेफ बनाम् फिलिप कार्बन ब्लैक लि. एवं अन्य।
(2016) 1 SCC (क्रिमिनल) 173, अल्ट्राटेक सीमेंट लि. बनाम् राकेश कुमार सिंह एवं अन्य।
उपरोक्त में से कोई नहीं।
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करने में हुई विलंबता को माफ किया जा सकता है:
भारतीय परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के तहत
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 142 के तहत
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 143 के तहत
निम्नलिखित में से विनिमय साध्य विलेख अधिनियम, 1881 किस धारणा को साक्ष्य का विशेष नियम बनाने का प्रावधान करता है, जब तक कि इसके विपरीत प्रावधान न किया जाए?
प्रत्येक विनिमय साध्य विलेख जिस पर तारीख अंकित हो, उस तारीख को न तो बनाया गया था और न ही तैयार किया गया था।
प्रत्येक विनिमय साध्य विलेख का हस्तांतरण उसकी परिपक्वता से पहले नहीं किया गया था।
खोए हुए प्रतिज्ञापत्र, विनिमय पत्र या चेक पर विधिवत् स्टाम्प लगा हुआ था।
ऊपर के सभी।
निम्नलिखित में से किस निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि केवल वे न्यायालय जिनकी क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर आहर्ता बैंक स्थित है, को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अधीन अपराध के मामलों की सुनवाई करने का क्षेत्राधिकार होगा?
के. भास्करन बनाम शंकरन वैद्यन बालन और अन्य (1999) 7 एससीसी 510
दशरथ रूपसिंह राठौड़ बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य (2014) 9 एससीसी 129
बिहार राज्य एवं अन्य बनाम कल्याणपुर सीमेंट लिमिटेड (2010) 3 एससीसी 274
इनमें से कोई भी नहीं
पृष्ठांकक की सहमति के बिना किसी परक्राम्य लिखत में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन, परक्राम्य लिखत को इस प्रकार प्रस्तुत करता है:
अमान्य करणीय
शून्यता
अमान्य
इनमे से कोई भी नहीं।
किस निर्णय में माननीय उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया है कि यदि चैक के पूर्व अनादरण व इस हेतु जारी नोटिस के आधार पर कोई परिवाद प्रस्तुत नहीं किया गया हो तो चैक के द्वितीय अथवा पश्चातवर्ती अनादरण होने के आधार पर परिवाद पोषणीय है?
(2013) 1 एस.सी.सी. 177, एम.एस.आर. लेदर्स बनाम् एस. पलानीअप्पन एवं अन्य।
(1998) 6 एस.सी.सी. 514, सदानंदन भद्रां बनाम् माधवन सुनील कुमार।
(1999) 4 एस.सी.सी. 567, सिल इम्पोर्ट यू.एस.ए. बनाम् एग्जिम एडस सिल्क एक्सपोर्टर्स बैंगलोर।
(2004) 13 एस.सी.सी. 498, कृष्णा एक्सपोर्टस एवं अन्य बनाम् राजू दास।
एक व्यक्ति (आदाता) एक खाली चैक हस्ताक्षरित करता है तथा उसे दूसरे व्यक्ति (धारक) को देता है तथा धारक राशि व दिनांक हेतु निर्धारित खाली स्थान को भरता है तथा इसे अपने बैंक खाते में प्रस्तुत करता है तथा यह अनादरित हो जाता है। ऐसी स्थिति में निम्न में से कौनसा कथन सही है?
धारक ने कूटरचना की है।
चैक को अवैध माना जायेगा।
चैक को बैंक स्वीकार नहीं करेगा।
धारक को बैंक में चैक प्रस्तुत करने पर अनादरित हो जाने का परिवाद प्रस्तुत करने का अधिकार होगा।
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 और 142 के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
चेक जारी होने की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर या इसकी वैधता अवधि के भीतर, जो भी पहले हो, बैंक को प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
बैंक से चेक वापस होने की सूचना प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर, चेक जारीकर्ता को नोटिस दिया जाना चाहिए, जिसमें धनराशि के भुगतान की मांग की जानी चाहिए।
यदि चेक जारीकर्ता ऐसी सूचना प्राप्त होने के पंद्रह दिनों के भीतर भुगतान करने में विफल रहता है, तो चेक प्राप्तकर्ता या धारक को एक महीने के भीतर शिकायत दर्ज करनी होगी।
उपरोक्त सभी
निम्न में से किसमें, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम से उत्पन्न मामले में यदि दोनों संव्यवहार एक ही संव्यवहार के भाग हों तो अनुक्रमिक दण्डों को समवर्ती रूप से चलाने का आदेश दिया जा सकेगा?
(2010) 5 एस.सी.सी. 663, दामोदर एस. प्रभू बनाम् सैयद बाबालाल एच.।
(2016) 3 एस.सी.सी. 1, डोन ऐन्जिया बनाम् असम राज्य एवं अन्य।
(2009) 1 एस.सी.सी. 706, महेन्द्रा एण्ड महेन्द्रा फाइनेन्सियल सर्विसेज लि. एवं अन्य बनाम् राजीव दुबे।
(2016) 10 एस.सी.सी. 761, श्याम पाल बनाम् दयावती बसोया एवं अन्य।