निम्न में से किसमें, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम से उत्पन्न मामले में यदि दोनों संव्यवहार एक ही संव्यवहार के भाग हों तो अनुक्रमिक दण्डों को समवर्ती रूप से चलाने का आदेश दिया जा सकेगा?
Correct Answer: D — (2016) 10 एस.सी.सी. 761, श्याम पाल बनाम् दयावती बसोया एवं अन्य।
Explanation:
सही उत्तर (2016) 10 एस.सी.सी. 761, श्याम पाल बनाम् दयावती बसोया एवं अन्य है।
श्याम पाल बनाम दयावती बेसोया, (2016) 10 एस.सी.सी. 761 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम से उत्पन्न मामले में, यदि दोनों लेनदेन एकल लेनदेन का हिस्सा हैं, तो क्रमिक सजाओं को एक साथ चलाने का निर्देश दिया जा सकता है।
न्यायालय ने दोहराया कि दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 427 के तहत न्यायालय अपने विवेक का प्रयोग कैदियों के लाभ के लिए उन मामलों में कर सकते हैं जहां अभियोजन एक ही लेन-देन पर आधारित है, भले ही उससे संबंधित अलग-अलग शिकायतें क्यों न दर्ज की गई हों।
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 427 के अनुसार, जब पहले से कारावास की सजा काट रहा कोई व्यक्ति किसी पश्चातवर्ती दोषसिद्धि पर कारावास या आजीवन कारावास से दण्डित किया जाता है, तो ऐसा कारावास उस कारावास की समाप्ति पर प्रारम्भ होगा, जब तक कि न्यायालय यह निदेश न दे कि पश्चातवर्ती सजा पूर्ववर्ती सजा के साथ-साथ चलेगी।