परिसीमा अधिनियम, 1963 के प्रयोजनार्थ अकिंचन की दशा में वाद संस्थित होता है;
जब समुचित कार्यालय में वादपत्र प्रस्तुत किया जाता है।
जब अकिंचन के रूप में वाद लाने की अनुमति का आवेदन किया जाता है।
जब अकिंचन के रूप में वाद लाने की अनुमति का आवेदन पत्र स्वीकार किया जाता है।
उपरोक्त में से कोई नहीं।
Answer and explanation
परिसीमा अधिनियम 1963 की धारा 3 परिसीमा निषेध से संबंधित है । (1) धारा 4 से धारा 24 (सम्मिलित) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, विहित अवधि के पश्चात् संस्थित किया गया प्रत्येक वाद, प्रस्तुत की गई प्रत्येक अपील और किया गया आवेदन खारिज कर दिया जाएगा, भले ही बचाव के रूप में परिसीमा स्थापित न की.
