परिसीमा अधिनियम, 1963 के प्रयोजनार्थ अकिंचन की दशा में वाद संस्थित होता है;
जब समुचित कार्यालय में वादपत्र प्रस्तुत किया जाता है।
जब अकिंचन के रूप में वाद लाने की अनुमति का आवेदन किया जाता है।
जब अकिंचन के रूप में वाद लाने की अनुमति का आवेदन पत्र स्वीकार किया जाता है।
उपरोक्त में से कोई नहीं।
