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(A) अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 4 के तहत दर्ज बांड की किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर, न्यायालय अपराधी को मूल अपराध के लिए दंडित कर सकता है, या पहली विफलता पर ₹50 तक का जुर्माना लगा सकता है।
(B) इक्कीस वर्ष से अधिक आयु के अपराधी को अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 3 और 4 के तहत परिवीक्षा नहीं दी जा सकती।
(C) अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 8 के तहत न्यायालय के आदेश पर नया बांड दर्ज न करने पर, न्यायालय अपराधी को उस अपराध के लिए दंडित नहीं करेगा जिसके लिए वह दोषी पाया गया था।
(D) अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 5 के तहत अपराधी पर लगाए गए मुआवजे की राशि को दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार जुर्माने के रूप में वसूल किया जा सकता है।
उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Correct Answer: D — कथन (D) और (A)
कथन (A) सही है: धारा 9(3) के तहत बांड शर्तों के उल्लंघन पर न्यायालय अपराधी को मूल अपराध के लिए दंडित कर सकता है या पहली विफलता पर ₹50 से अधिक का जुर्माना नहीं लगा सकता। कथन (D) सही है: धारा 5(2) के तहत धारा 5(1) के अंतर्गत आदेशित मुआवजा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 386 और 387 के तहत जुर्माने के रूप में वसूल किया जा सकता है। कथन (B) और (C) गलत हैं — अधिनियम में परिवीक्षा के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा नहीं है, और धारा 8 के तहत नया बांड न दर्ज करने पर न्यायालय दंड दे सकता है।