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परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करने में हुई विलंबता को माफ किया जा सकता है:
(C) परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 142 के तहत
Explanation:
सही उत्तर परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 142 के तहत है।
परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 142 अपराधों के संज्ञान से संबंधित है। यह प्रावधान करती है कि कोई भी न्यायालय धारा 138 के तहत दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान चेक प्राप्तकर्ता या धारक द्वारा लिखित रूप में की गई शिकायत के अलावा नहीं लेगा।
धारा 142(1)(b) के परन्तुक में विशेष रूप से कहा गया है कि यदि शिकायतकर्ता न्यायालय को यह समाधान कर दे कि निर्धारित अवधि के भीतर शिकायत न करने के लिए उसके पास पर्याप्त कारण था, तो न्यायालय निर्धारित अवधि के पश्चात भी शिकायत का संज्ञान ले सकेगा।