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एक लिखत में, पक्षकारों की पारस्परिक भूल जो कि उनके वास्तविक आशय को अभिव्यक्त नहीं करती है, लिखत के किसी भी पक्षकार द्वारा परिशोधित करवाई जा सकती है;
(C) विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम, 1963 की धारा 26 के अन्तर्गत वाद संस्थित करके ।
Explanation:
विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम 1963 की धारा 26 इस बात से संबंधित है कि लिखत को कब सुधारा जा सकता है।