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'सतों दखत जग बौराना।'
आरोह भाग-1 के आधार पर कबीर की इस पंक्ति में प्रयुक्त 'दखत' शब्द का अर्थ है?
(D) देखो
Explanation:
'दखत' का अर्थ 'देखो' है — कबीर सज्जनों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि देखो, यह संसार पागल हो गया है जो सच बोलने वाले को मारने दौड़ता है और झूठ पर विश्वास करता है। यह पंक्ति आरोह भाग-1 में संकलित कबीर की 'साखी' से उद्धृत है; कबीर (लगभग 1398–1518 ई.) भक्तिकाल की निर्गुण काव्यपरंपरा के प्रमुख संत कवि हैं।